गुजरात के सूरत शहर में, नयना मंडावी नाम की एक मां अपने ढाई साल के बेटे के गुम होने की रिपोर्ट लेकर थाने पहुंची। उसने तीन दिनों तक अपने बच्चे की तलाश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
जब पुलिस ने मामले की जांच शुरू की, तो नयना खुद संदिग्ध बन गई।
नयना ने अपने बेटे वीर मंडावी के गुम होने की शिकायत की थी, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच की, लेकिन बच्चे का कहीं भी दिखाई नहीं देना इस बात का संकेत था कि वह कंस्ट्रक्शन साइट से बाहर नहीं गया। नयना के जवाब भी संतोषजनक नहीं थे।
पुलिस ने डॉग स्क्वॉड की मदद भी ली, लेकिन वह भी कंस्ट्रक्शन साइट से बाहर नहीं गया। इससे पुलिस को यह समझ में आ गया कि बच्चा वहां से बाहर नहीं गया।
प्रेमी पर आरोप और सच्चाई का खुलासा
नयना ने पुलिस को बताया कि उसका एक प्रेमी है, जो झारखंड में रहता है, और हो सकता है कि उसने बच्चे का अपहरण किया हो। पुलिस ने प्रेमी की लोकेशन ट्रेस की, लेकिन वह सूरत में नहीं था। यह नयना का एक और झूठ था।
जब पुलिस ने नयना से सख्ती से पूछताछ की, तो उसने अपने बेटे की हत्या की बात स्वीकार कर ली। उसने बताया कि उसने लाश को गड्ढे में दफनाया है।
पुलिस ने उसकी बताई जगह पर खुदाई की, लेकिन लाश नहीं मिली। फिर नयना ने कहा कि उसने लाश तालाब में फेंक दी है, लेकिन वहां भी कुछ नहीं मिला। अंततः उसने स्वीकार किया कि लाश कंस्ट्रक्शन साइट के टॉयलेट के लिए बनाए गए गड्ढे में है।
हत्या का कारण और पुलिस की प्रतिक्रिया
सूरत पुलिस के डीसीपी भागीरथ गढवी ने बताया कि नयना ने 27 जून को अपने बच्चे की गुमशुदगी की शिकायत की थी। जब पुलिस को उस पर शक हुआ, तो सख्ती से पूछताछ की गई।
नयना ने बताया कि उसके प्रेमी ने कहा था कि अगर वह अपने बच्चे के साथ उसके पास आएगी, तो वह उसे स्वीकार नहीं करेगा। इस डर से उसने अपने बेटे की हत्या कर दी।
महिला ने हत्या के बाद लाश को छिपाने के लिए फिल्म ‘दृश्यम’ से प्रेरणा ली थी। घटना के खुलासे के बाद पुलिस भी हैरान रह गई।
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