
मान्यता है कि भगवान परशुराम आज भी जीवित हैं और किसी गुप्त स्थान पर रहकर तपस्या कर रहे हैं, ऐसे में इस दिन परशुराम जी की विधिवत पूजा करने वालों को साहस, पराक्रम और अपार शक्ति का आशीर्वाद मिलता है. शत्रु पर विजय प्राप्त होती है. परशुराम जयंती 2025 में कब है, इसका पूजा मुहूर्त भी जान लें.
परशुराम जयंती पूजा मंत्र
ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि, तन्नोपरशुराम: प्रचोदयात्।।
ॐ ब्रह्मक्षत्राय विद्महे क्षत्रियान्ताय धीमहि तन्नो राम: प्रचोदयात्।।
परशुराम जयंती पूजा विधि
तृतीया तिथि पर सूर्योदय से पहले पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है.
यदि नदी पर नहीं जा सकते हैं तो घर पर ही स्नान करने के बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें.
इसके बाद धूप दीप जलाएं और व्रत का संकल्प करें.
परशुराम भगवान विष्णु के अवतार हैं इसलिए विष्णु जी को चंदन, तुलसी के पत्ते, कुमकुम, अगरबत्ती, फूल और मिठाई अर्पित करके विधिवत उनकी पूजा करें.
चाहें तो किसी मंदिर में जाकर भगवान परशुराम के दर्शन और पूजा अर्चना करें.
इस दिन व्रतधारियों को किसी भी प्रकार के अनाज या दाल का सेवन नहीं करना चाहिए.
मटका, अन्न, खरबूजा आदि का दान करें.
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