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राज्य के विधायकों को उनके निर्वाचन क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए आवंटित की जाने वाली ग्रांट में भारी वृद्धि की गई है। गुजरात सरकार के निर्णय के अनुसार विधायकों को स्थानीय महत्व के सामूहिक विकास कार्यों के लिए आवंटित की जाने वाली 1.50 करोड़ रुपये की वर्तमान वार्षिक ग्रांट में एक करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है।

अब, विधायकों को 2.50 करोड़ रुपये के हिसाब से वार्षिक ग्रांट दी जाएगी।

मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने इस ग्रांट आवंटन के पीछे यह दृष्टिकोण भी अपनाया है कि राज्य के विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण के कार्य शुरू कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रेरित ‘कैच द रेन’ अभियान को गति दें। उल्लेखनीय है कि वर्षा जल के संचयन से भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और भूगर्भ जल स्तर को ऊंचा उठाने के उद्देश्य से राज्य में 2018 से प्रतिवर्ष सुजलाम सुफलाम जल अभियान आयोजित किया जा रहा है। इस अभियान के तहत तालाबों को गहरा करना, चेकडैमों की गाद निकालना, नहरों तथा छोटी नहरों की मरम्मत, रखरखाव और साफ-सफाई, मिट्टी के तटबंध तथा रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे जल संचयन के विभिन्न कार्य जनभागीदारी के जरिए किए जाते हैं।

इस अभियान की सफलता के चलते पिछले 7 वर्षों में जल संग्रहण क्षमता में 1,19,144 लाख घनफुट की वृद्धि हुई है तथा 199.60 लाख मानव दिवस रोजगार का सृजन हुआ है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पानी की हर एक बूंद के संग्रहण के लिए ‘कैच द रेन’ अभियान में देशव्यापी भागीदारी का आह्वान किया है। इस आह्वान के समर्थन में राज्य के विधायक भी अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में वर्ष जल संचयन के अधिक से अधिक कार्यों का आयोजन करें, ऐसा दृष्टिकोण मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने अपनाया है। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि विधायकों को आवंटित की जाने वाली विकास कार्यों की इस ग्रांट में से 50 लाख रुपये ‘कैच द रेन – सुजलाम सुफलाम जल अभियान 2.0’ के अंतर्गत उनके निर्वाचन क्षेत्रों में जल संचयन और जल संरक्षण कार्यों के लिए उपयोग में लिए जाएं।

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