
गोधरा में जेजेबी के अध्यक्ष के एस मोदी ने तीनों दोषियों को तीन साल के लिए अभिरक्षा गृह भेज दिया और उन पर 10,000-10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
बोर्ड ने मामले में आरोपी दो अन्य लोगों को बरी कर दिया, जो इस भयावह घटना के समय नाबालिग थे।
बचाव पक्ष के वकील सलमान चरखा ने बताया कि जेजेबी ने तीनों दोषियों को अपीलीय अदालत में आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति देने के लिए सजा को 30 दिन के लिए निलंबित कर दिया।
सत्ताईस फरवरी, 2002 को गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में भीड़ द्वारा आग लगा दिए जाने से 59 लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकतर ‘कारसेवक’ थे। इस घटना के बाद राज्य में व्यापक सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे, जिसमें एक हजार से अधिक लोग मारे गए थे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, तीनों आरोपी उस भीड़ का हिस्सा थे जिसने साजिश रचने के बाद अयोध्या से आ रही साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच पर पथराव किया और आग लगा दी। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता के तहत हत्या, आपराधिक साजिश, हत्या का प्रयास, जानबूझकर चोट पहुंचाने समेत संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
वकील सलमान चरखा ने बताया कि मामले में आरोपी के रूप में नामित छह किशोरों के खिलाफ अलग-अलग आरोपपत्र दाखिल किए गए थे।
चरखा ने कहा कि सभी आरोपपत्रों को एक साथ मिलाकर सुनवाई की गई। बोर्ड के समक्ष मामले के लंबित रहने के दौरान छह आरोपियों में से एक की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि अन्य दो को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
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