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लोकसभा ने पास किया त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय बिल!!!कौन है त्रिभुवनदास पटेल???

गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक पेश किया. इस दौरान गृह मंत्री ने विपक्षी दल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और कहा कि विपक्ष इसलिए विरोध कर रहा है क्योंकि किसी खास परिवार के नाम पर विश्वविद्यालय नहीं बनाया गया.

अब मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर त्रिभुवनदास केशुभाई पटेल कौन हैं, जिनके नाम पर यह बिल लाया गया? त्रिभुवन का अमूल से क्‍या कनेक्‍शन है? हम आपको बता दें कि त्रिभुवन दास पटेल एक कांग्रेस नेता थे, जो सरदार वल्लभ भाई पटेल के करीबी थे. उन्‍होंने दूध निर्माता कंपनी अमूल की शुरुआत की.

अमित शाह ने संसद में तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेसियों को यह नहीं पता कि त्रिभुवन दास पटेल भी उनके ही नेता थे. इसके साथ ही उन्होंने मोदी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले की सरकारों में सहकारी संस्थाओं के साथ टैक्स को लेकर अन्याय होता था, लेकिन मोदी सरकार ने प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसाइटीज (PACS) को सम्मान दिया और उन पर लगने वाले टैक्स को कम किया. त्रिभुवनदास केशुभाई पटेल एक स्वतंत्रता सेनानी और सहकारिता आंदोलन के अग्रणी नेता थे, जिन्होंने भारत में दुग्ध सहकारिता की नींव रखी. उनका सबसे बड़ा योगदान आनंद मिल्क यूनियन लिमिटेड यानी ‘अमूल’ की स्थापना करना रहा है. जिसने देश में श्वेत क्रांति की शुरुआत की.

दो गांव से की अमूल की शुरुआत
14 दिसंबर 1946 को गुजरात के आणंद में त्रिभुवन दास पटेल ने खेड़ा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ की स्थापना की, जो बाद में ‘अमूल’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ. यह पहल उस समय शुरू हुई जब गुजरात के किसानों का दूध व्यापारियों और बिचौलियों द्वारा शोषण किया जा रहा था. सरदार वल्लभभाई पटेल के मार्गदर्शन में त्रिभुवन दास ने किसानों को संगठित कर एक सहकारी मॉडल तैयार किया, जिसने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया. शुरुआत में अमूल केवल 247 लीटर दूध के साथ दो गांवों से शुरू हुआ था, लेकिन आज यह भारत का सबसे बड़ा दुग्ध ब्रांड बन चुका है. त्रिभुवनदास केशुभाई पटेल ने 1970 के दशक तक इसके अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और इस दौरान डॉ. वर्गीज कुरियन को तकनीकी और विपणन जिम्मेदारियां सौंपीं, जिन्होंने इसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई. आज अमूल 36 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों को जोड़ता है और इसका टर्नओवर 50,000 करोड़ रुपये से अधिक है.

सहकारी यूनिवर्सिटी का नाम त्रिभुवन दास पटेल के नाम पर क्यों?
गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बताया कि त्रिभुवन सहकारिता यूनिवर्सिटी का नाम त्रिभुवन दास पटेल के नाम पर रखा गया है, क्योंकि उन्होंने सहकारिता के क्षेत्र में जो बीज बोया, वह आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है. शाह ने कहा, “250 लीटर दूध से शुरू हुआ सफर आज अमूल के रूप में हमारे सामने है. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा त्रिभुवनदास केशुभाई पटेल को दी गई बड़ी श्रद्धांजलि है.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि त्रिभुवन दास ने ही वर्गीज कुरियन को डेनमार्क भेजकर दुग्ध उत्पादन का अध्ययन कराया था, जिससे अमूल की सफलता की नींव मजबूत हुई.

विपक्ष पर हमला और सरकार की उपलब्धियां
शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष को सहकारिता आंदोलन की समझ नहीं है और वह केवल राजनीति कर रहा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार ने सहकारी संस्थाओं को सशक्त करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें PACS पर टैक्स कम करना और उनकी गरिमा बढ़ाना शामिल है. यह बिल लोकसभा से ध्वनिमत से पारित हो गया, जिसे सरकार ने सहकारिता क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम बताया. त्रिभुवनदास केशुभाई पटेल का नाम आज भी सहकारिता और किसान सशक्तिकरण का पर्याय है और उनकी विरासत को सम्मान देने के लिए यह यूनिवर्सिटी उनके नाम पर स्थापित की जा रही है.

(इस खबर को अभिनव भारत न्यूज की टीम ने संपादित नहीं किया है. यह न्यूज डिजिटल मीडिया के माध्यम से सीधे प्रकाशित की हुई है.
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