चोरी के मामलों में पहले से ही आरोपित एक गैंग ने मंदिरों के दान पेटियों को निशाना बनाने का नया तरीका ईजाद किया था. यह गिरोह कोर्ट हियरिंग के बहाने अलग-अलग शहरों में जाता, दिन में मंदिरों की रेकी करता और रात में चोरी करके फरार हो जाता.

गुरुवार को वडोदरा क्राइम ब्रांच ने इस गैंग के तीन सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया और 5 लाख रुपये की संपत्ति बरामद की.
दिन में रेकी, रात में चोरी
आरोपी पहले से चल रहे चोरी के मामलों में हियरिंग के लिए अलग-अलग शहरों में जाते थे. कोर्ट से लौटते समय रास्ते में पड़ने वाले अनगार्डेड मंदिरों का पता लगाते और रात में वहां चोरी करते. वे मंदिर की दान पेटी में सिक्का डालकर आवाज सुनते थे ताकि अंदाजा लगा सकें कि पेटी भरी हुई है या नहीं. पहले बाइक चुराते, फिर उसी पर मंदिर तक जाते और चोरी के बाद बाइक छोड़कर पैदल भाग जाते.
क्यों चुने मंदिर?
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने मकानों की जगह मंदिरों को निशाना बनाना इसलिए शुरू किया क्योंकि मकानों में मालिकों के जागने का डर था, जबकि मंदिर रात में खाली रहते हैं. दान पेटी में सीधे नकदी मिल जाती है, जबकि जेवरात बेचने में रिस्क होता. पहले से ही चोरी के केसों में फंसे होने के कारण उन्हें कोर्ट के बहाने शहर घूमने का मौका मिल जाता था.
कितनी बार की चोरी?
अक्टूबर 2024 से अब तक इस गैंग ने गुजरात के विभिन्न मंदिरों में 22 चोरियां कीं. गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम हैं:
उमेश मेड़ा (25) – भरूच, सूरत, दाहोद और गांधीनगर में 6 केस.
गोविंद मछर (23) – सूरत, गांधीनगर और दाहोद में 3 केस.
अजय मेड़ा (23) – भरूच और सूरत में 4 केस.
क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने आरोपियों से तीन चोरी की गई बाइक्स, 7 मोबाइल फोन, देवी-देवताओं की मूर्तियां, जेवरात और नकदी जब्त की. यह सामान वडोदरा और आसपास के 6 मंदिरों से चुराया गया था.
पुलिस ने कैसे पकड़ा?
एक सूचना के आधार पर पुलिस ने वडोदरा के गोल्डन चौकड़ी इलाके में इन्हें घेर लिया. आरोपी दाहोद से सूरत जाते समय एक मंदिर से चोरी का सामान ले जा रहे थे. यह गैंग परिवार और रिश्तेदारों तक ही सीमित था ताकि बाहरी लोगों से धोखा न हो. अब पुलिस अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है.
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