
हालांकि, आवेदक ने उच्च न्यायालय की लाइव स्ट्रीमिंग में भाग लेते समय सिगरेट पी. जिस पर उच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया. एकल न्यायाधीश पीठ ने इस घटना पर बड़ी अवमानना कार्रवाई करने के लिए आदेश को अवमानना पीठ को भेज दिया.
न्यायाधीश ए.एस. की खंडपीठ के समक्ष इस अवमानना याचिका की सुनवाई हुई. सुपेहिया एवं न्यायाधीश निशा ठाकोर की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को 02 लाख रुपए जुर्माना अदा करने का निर्देश दिया. उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता 11 मार्च 2025 को एकल न्यायाधीश पीठ के समक्ष अलग-अलग समय पर आधे घंटे के लिए लाइव स्ट्रीमिंग में शामिल हुआ था. उसने गुजरात उच्च न्यायालय के लाइव स्ट्रीमिंग नियमों का उल्लंघन किया. न्यायालय में शिष्टाचार और अनुशासन कायम नहीं रखा गया. यदि आवेदक न्यायालय में शारीरिक रूप से उपस्थित होता और सिगरेट जलाने का साहस करता. तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाता और सलाखों के पीछे डाल दिया जाता.
हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता अपने मामले को लेकर बहुत चिंतित है. उनका केस 12 तारीख को था, लेकिन स्थानीय वकील ने उन्हें 11 तारीख को लिंक भेजा. जब उन्हें यह लिंक मिला तो उन्हें यह नहीं पता था कि इस लिंक से जुड़कर लोग उन्हें कोर्ट में और यूट्यूब पर देख सकेंगे. वह शराब पीने की लत और व्यक्तित्व विकार से पीड़ित है. उन्हें मेडिकल रिमांड पर रखा गया है. इस घटना के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ दर्ज शिकायत के आधार पर उसे गिरफ्तार कर रिमांड पर ले लिया. याचिकाकर्ता के वकील की दलीलों को ध्यान में रखते हुए उच्च न्यायालय ने उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया. यह राशि 02 सप्ताह के भीतर गुजरात उच्च न्यायालय विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करने का आदेश दिया गया.
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