
जांच में यह भी सामने आया है कि अस्पताल ने फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया था और यहां तक कि फर्जी आईसीयू और ट्रॉमा सेंटर की सुविधाएं भी दी जा रही थीं।
इस अस्पताल के संचालक, धर्मेंद्र उर्फ संजय पटेल, ने खुद को डॉक्टर बताकर एक तीन सितारा अस्पताल खोल रखा था। उन्होंने अहमदाबाद मेडिकल काउंसिल से भी नकली प्रमाणपत्र प्राप्त कर लिया था। इस अस्पताल में न सिर्फ मरीजों से धोखाधड़ी की जा रही थी, बल्कि वॉइट डॉक्युमेंट्स के जरिए बीमा कंपनियों से भी पैसे क्लेम किए जा रहे थे। इस मामले में अब तक की जांच से यह साफ है कि बड़ी माप में बीमा कंपनियों और मरीजों के साथ धोखाधड़ी की जा रही थी, और जल्द ही और खुलासे होने की संभावना है।
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