गुजरात में आदिवासी शख्स ने की आत्महत्या पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप…

गुजरात के भरूच में आदिवासी समुदाय के एक शख्स ने आत्महत्या कर ली। इस घटना को लेकर न सिर्फ कांग्रेस ने बल्कि बीजेपी के नेताओं ने भी सख्त कार्रवाई की मांग की है और इस शख्स के परिवार को इंसाफ देने की मांग उठाई है।
जिस शख्स ने आत्महत्या की उसका नाम कीर्तन वसावा था और वह कविथा गांव का रहने वाला था। उसने अपने सुसाइड नोट में तीन पुलिसकर्मियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। वसावा ने शुक्रवार को आत्महत्या की थी।
कीर्तन वसावा की जेल से एक सुसाइड नोट मिला है। इसकी एक कॉपी The Indian Express के पास है। इसमें नबीपुर पुलिस के इंस्पेक्टर एमके परमार, हेड कांस्टेबल राजेंद्र सिंह और संदीप का नाम लिखा है।
पुलिस जब वसावा के शव को भरूच सिविल अस्पताल लाई तो बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग वहां पहुंच गए। उन्होंने वहां जोरदार प्रदर्शन किया और जिनके पुलिसकर्मियों के नाम वसावा ने अपने सुसाइड नोट में लिखे थे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
शनिवार को वसावा की बेटी हीराबेन ने तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ नबीपुर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। भरूच के पुलिस उपाधीक्षक सीके पटेल इस मामले की जांच कर रहे हैं।
सीके पटेल ने बताया, ‘कीर्तन वसावा को शराबबंदी और जुए के दो मामलों में गिरफ्तार किया गया था। नबीपुर पुलिस ने शराबबंदी के मामले में उसकी कार जब्त की थी। हमने तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।’
क्या लिखा था सुसाइड नोट में?
सुसाइड नोट में वसावा ने लिखा था कि पुलिस वाले उसे एक झूठे मामले में परेशान कर रहे हैं। वसावा ने लिखा था, ‘मैं पहले शराब बेचता था लेकिन चार महीने पहले यह काम बंद कर दिया था। उन्होंने जबरन मुझसे कबूलनामा लिया, मामला दर्ज किया और मेरी कार जब्त कर ली, अब वे इसे छोड़ नहीं रहे हैं। वे आए दिन मेरे घर आते हैं और मेरी पत्नी, बहन और बेटी के सामने बेहूदगी करते हैं। कई बार मैं उनके साथ थाने भी गया।’
वसावा ने सुसाइड नोट में आगे लिखा था, ‘वे चाहते हैं कि मैं अवैध शराब की बिक्री करता रहूं। वे लगातार मुझसे पैसे मांगते हैं और धमकाते हैं जबकि मैंने यह काम बंद कर दिया है। मैं तंग आ चुका हूं और अब कोई उम्मीद नहीं है। मेरी मौत के बाद कोई मेरे परिवार को परेशान न करे। यह सुसाइड नोट भरूच के पुलिस अधीक्षक तक पहुंचना चाहिए और एम. के. परमार, संदीप और राजेंद्र सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।’
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